समुद्र सी स्याही

कौन कहता है तस्वीर बोलती नहीं,
शायद कान्हा से बात की ही नहीं l                            
मैं सोचती हूँ यदि पूरब पश्चिम,
तो कान्हा सोचता है उत्तर दक्षिण l                          
कभी मेरी रजा और उसकी रजा,
होती नहीं कभी भी जुदा l                        
भोजन करने से पहले भोग लगाओ,
स्वाद वो होगा जो था ही नहीं l                        
पिलाकर पानी देखो तस्वीर को,
अमृत कहने लगोगे उस जल को l                          
दिल भारी लगने लगे जब अपना,
कान्हा से बात करके देखो जरा l                        
क्यों राधा और मीरा दीवानी थी,
आत्मिक प्रेम ही इनकी कहानी थी l                      
कान्हा की महिमा का वर्णन कैसे करूँ,
पर्वत उसने उंगली पर उठा लिया l    
दुनिया की सारी कलमें कागज समुद्र सी स्याही,
न होगी पर्याप्त तेरी महिमा लिखने को l        
कालिया नाग को मार गिरा दिया,
मामा कंस अपने का वध किया l              
मुस्कुराकर तस्वीर को देखोगे तो,
कान्हा भी मुस्कुराता दिख जायेगा l              
देवकी माँ यशोदा प्यारी प्यारी माँ,
किसी मे था उन्हें अंतर कहाँ l                    
सत्य पथ पर चलकर देखो यदि अगर,
मन प्रफुल्लित और आनंदित हो जाओगे l    
कौन कहता है तस्वीर बोलती नहीं,
शायद कान्हा से बात की ही नहीं l                

पूनम पाठक बदायूं