बसंत

अमुआ के डाली जब कुहके कोयलिया
बहे बसंत पुरबैया!
रंग बिरंगी फुलवा बीच हरी पत्तियां
मधुर मधुर मन महके फुलबरिया!
गुंजन करत भंवरा छुपे बीच पंखुड़ियां!
मटक फिरत तितलियां!
बोले पपिहा पीहू पीहू, नृत्य करत मयूरा!
झूमत झूला झूले सहेलियां
मंद मंद बहे बसंत पुरबैया!

परिचय- रीता मिश्रा तिवारी
अध्यापिका
भागलपुर, बिहार