हर स्त्री के भीतर असंख्य रंगों के परों से सजी एक परी छुपकर बैठी है।

हर स्त्री के भीतर असंख्य रंगों के परों से सजी एक परी छुपकर बैठी है।

 वो अपने खुद के तसव्वुर से रचाए 

सियासत की रानी है, जो आपको अपने वजूद से उखाड़ कर खिंचकर ले जा सकती है।

"या तो चाँद पर या तो जहन्नुम में"

निर्भर है आप उसके परों पर बिखरे किस रंग को किस भाव से छुते हो।

 "ज़रा संभल कर छूना उसके मखमली परों को" "सत्यबोध समझ लो"

स्त्री तन ताजमहल सा पाक और मंदिर सा पवित्र होता है कहीं,

आपकी छुअन मखमली फूलदल को ज्वालामुखी का ढ़ेर न बना दे।

छूने से पहले चंद पल रुक कर तय कर लो रंगना है, जलना है, या मरना है।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु) #भावु