कोरोना

लापरवाही की हद तो,

 सबने किया है।

निमंत्रण कोरोना को,

मिलकर दिया है।

मुख पर से मास्क ,

झटक दूर फेंका।

आगे और पीछे,

नहीं मुड़कर देखा।।

छुआ छूत दूरी का ,

पालन किया ना,

आजाद पंछी बनकर जिया है---

निमंत्रण कोरोना को ,

मिलकर दिया है।

लापरवाही का फायदा,

उठाया कोरोना।

केक काटकर बरसी,

मनाया कोरोना। 

 पिछले बरस की तरह,

करने को फिर कुछ,

आभार सबका ,

जताया कोरोना।।

-गौरीशंकर पांडेय'सरस।