टीका लगने से अस्पताल में भर्ती होने वाले स्वास्थ्य बीमाधारकों का खर्च उठाएंगी कंपनियां

नई दिल्ली : कोविड-19 का टीका लगने के बाद प्रतिकूल असर से अस्पताल में भर्ती होने वाले स्वास्थ्य बीमाधारकों का खर्च कंपनियां उठाएंगी। इरडा ने इस बाबत बीमा कंपनियों को निर्देश जारी किए हैं। इरडा ने कहा है कि स्वास्थ्य बीमा लेने वाले ग्राहक की कोविड-19 टीका लगने से तबियत खराब होती है। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, तो वह इलाज के खर्च के लिए बीमा कंपनी से क्लेम कर सकेगा। बीमा नियामक ने पिछले दिनों स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में कोविड-19 के इलाज को शामिल कराया था, लेकिन इसमें टीके का खर्च शामिल नहीं किया गया था, जो अब भी पॉलिसी से बाहर है।

बीमा नियामक इरडा ने स्टेंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी 'आरोग्य संजीवनी' के तहत कवर की राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का निर्देश दिया है। इस निर्देश के बाद इस पॉलिसी की न्यूनतम सीमा को कम करके 50 हजार रुपये और अधिकतम सीमा को और बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया गया है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने पिछले साल जुलाई में आरोग्य संजीवनी मानक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को लेकर दिशानिर्देश जारी किये थे।

इसमें बीमा कंपनियों को न्यूनतम एक लाख रुपये और अधिकतम पांच लाख रुपये तक का अनिवार्य बीमा कवर देने को कहा गया था। हालांकि, इरडा ने कहा है कि सुधार वाले नए दिशानिर्देश दो विशिष्ट सरकारी साधारण बीमा कंपनियों ईसीजीसी और एआईसी पर लागू नहीं होंगे। भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड कृषि क्षेत्र के लिए हैं जबकि ईसीजीसी निर्यात ऋण गारंटी कंपनी है जो कि निर्यातकों को समर्थन देती है।