गौरैया का ख्याल नहीं

एक गौरैया पेड़ पर बैठी ,सोच में थी उदास थी।

मानव को अब प्यार नहीं, अपने बच्चों से कराए दूरी ।

हालत बड़ी ही सोचनीय थी, मैं वहां से गुजर रही थी 

गौरैया ने मुझे रोक कहा ,दुनिया में यह क्या हो रहा ।

मकानों को बड़ा कर रहे हैं ,दिलों को छोटा कर रहे हैं।

घरों को लोग सजा रहे हैं, जंगलों को उजाड़ रहे हैं ।

चावल डालते हैं नमक के , पर नमक मुझे जहर है ।

अल्फा कटवर्म कीड़े खाते, तुम्हारी फसलों को बचाते हैं ।

पर्यावरण गड़बड़ा रहा है ,गौरैया का ख्याल नहीं रहा है।

प्रकृति की हर एक ही रचना ,सभी एक दूसरे पर निर्भर हैं।

मोबाइल फोन के टावर ,हम गौरैया को मार रहे हैं ।

बबूल कनेर नींबू अमरूद अनार ,मेहंदी बांस चांदनी पसंद हैं ।

आधुनिकता दुश्मन बन रही है, पर्यावरण की तरफ रुख नहीं है ।

तिनका तिनका बनाया घोंसला , फितूर से मानव कातिल बना है ।

चाहिए उसे स्वच्छता उसे, पर्यावरण गंदा कर रहा है।

कितना कुछ कहा गौरैया ने, कहते-कहते वह रोने लगी।

दर्द गौरैया का कभी मानव , क्यों जान नहीं पा रहा है।

अश्रु आए मेरी आंखों में ,सोचा गौरैया सच कह रही है।

अकेला चना भाड़ फोड़ न पाए,गोरिया मैं सब समझ रही हूं ।

मैं खुद को भी कोस रही हूं ,मैं गौरैया से वंचित हो रही हूं ।

गौरैया तुझसे बचपन से नाता है, बैठ कर तुझे देखा करती थी ।

कितनी चिड़िया घर में मेरे ,आंगन में बैठा करती थी ।

फुदक फुदक कर घूमा करतीं, आंगन में झुंड बनाती थीं।

गौरैया आपस में लड़ा करतीं थीं, चोंच खोल

खोल चीं ची करती थीं।

कहां गए वे दिन पहले से ,गौरैया जब मेरी सहेली थीं।

गौरैया अब मैं चलती हूं ,रक्षा करने का संकल्प करती हूं ।

जन-जन को सचेत करूंगी ,गौरैया को बचाओ बोलूंगी ।

गौरैया से सब प्यार करें, गौरैया हमारी रक्षा करें ।

स्वच्छता बढ़ाती हैं गौरैया ,वातावरण की सखी हैं गौरैया ।

एक गौरैया पेड़ पर बैठी , सोच में थी उदास थी ।

पूनम पाठक बदायूं