सबर किया है सबरी की ज्यों

एक वर्ष की खुशियाँ सारी, मैं माँगू अपनी झोली में ।
बहुत दिखाई बाट आपने ,बस आ जाना अब होली में ।।

                रंगों का त्योहार अधूरा ,
                बिना आपके मेरे साजन ।
                ऐसा न हो बिना तुम्हारे ,
                हाथ हिलाकर जाए फागन।
सबर किया है सबरी की ज्यों,बहला ना हँसी ठिठोली में।
बहुत दिखाई बाट आपने,बस आ जाना अब होली में ।।

                विरह ,जुदाई ,मौन, मन्नतें,
                रही सदा से इनकी संगत ।
                माना कि त्योहार रंगों का ,
                पर बिन तेरे कैसी रंगत।
अधरों में आवाज रुकी है अरु लब्ज लटकते बोली में ।
बहुत दिखाई बाट आपने,बस आ जाना अब होली में ।।

                काम अधूरे घर पर काफी,
                छोड़ गए जो जाते - जाते ।
                अब आया,अब आया कहकर,
                वर्ष बीत गया आते - आते ।
बिन सजना के कैसा सजना, मैं रहूँ पुरानी चोली में ।
बहुत दिखाई बाट आपने,बसब आ जाना अब होली में।।

                न बूढ़े माँ बाप से मिलना ,
                नहीं बच्चों का ध्यान रहा ।
                मरने से पहले दादी माँ ,
                का मिलना अरमान रहा।
पता नहीं कैसी शर्तों संग , फंसे हो सरहद - गोली में ।
बहुत दिखाई बाट आपने,बस आ जाना अब होली में ।।

नफे सिंह योगी मालड़ा ©
महेंद्रगढ़ हरियाणा