है कितनी प्यारी गौरैया

है   कितनी   प्यारी  गौरैया,

मेरे   घर   आती   गौरैया। 

नन्हीसी वह फुदक-फुदककर,

आ  जाती, उड़ती  फर - फर। 

तिनका -तिनका लेकर आती,

बड़ी  लगन  से  नीड  बनाती।

बनने   वाली   है   अब  मैया,

है   कितनी   प्यारी    गौरैया।

कभी   पेड़  की    डाल   पर,

तस्वीर के  पीछे  दीवाल पर। 

बड़े   प्रेम   से    घर   बनाती,

सुंदर   सुंदर  सपने  सजाती।

अंडे     देती    उनको    सेंती, 

बड़े प्यार से  सब  कर  लेती।

देगी  वह  ममता   की   मैैैया,

है   कितनी    प्यारी   गौरैया।

जब  बच्चे   आते   हैं   बाहर,

उसकी खुशी होती है जाहिर।

दाना   चुगती  उन्हें  खिलाती,

फर- फर  उड़ना  सिखलाती। 

स्वावलंबन   उसमें   है  भैया, 

है    कितनी   प्यारी   गौरैया।

आओ  मिलकर  इन्हें  बचाएँ,

पानी रखें और दाना खिलाएँ।

पेड़ों   को  काटें   ना,  लगाएँ, 

घर में इनको फिर से  बुलाएँ।

लगे  ना  ज्यादा  दाम  रुपैया,

है   कितनी    प्यारी    गौरैया, 

है   कितनी     प्यारी   गौरैया,

मेरे     घर    आती     गौरैया।

दीपिका गर्ग,वरिष्ठ कवयित्री व स्वतन्त्र 

लेखिका,जनपद-महोबा-उत्तर प्रदेश