गोरैय्या बचाओ तहरीक चलाना बेहद जरूरी ताकि आने वाले दिनों में इसकी नस्लें बचाई जा सके

लखनऊ : गोरैय्या को बचाने की तहरीक चलाना बेहद जरूरी है और यह काम बेदारी मुहीम के ज़रिए ही मुमकिन है। यह बातें नवाबी घराने सल्तनत मंजिल, हामिद रोड, सिटी स्टेशन, लखनऊ की बेगम नसीमा रज़ा ने कही ! उन्होंने आगे कहा की सिर्फ "विश्व गोरैय्या दिवस" मना कर खुश होने से काम नही चलेगा बल्कि पब्लिक प्लेस पर भी दाना पानी डाल कर अवामी बेदारी मुहीम चलाकर गोर्रैय्या को बचाया जा सकता है ! घरों में आम तौर से देखी जाने वाली ची..ची.. करती इस चिड़िया को भारत में गौरैय्या के नाम से जाना जाता है। इस से पहले की इसकी नस्ल खत्म हो जाए हमलोग को गौरैय्या बचाओ तहरीक के कार्य को आगे बढ़ना होगा। गौरैय्या अब हमारे घरों में पहले की तरह फुदकती नजर आए, हमें इसकी घर वापसी के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी होगी। बेगम नसीमा रज़ा और उनके पति नवाबजादा सैयद मासूम रज़ा, एडवोकेट चाहते हैं की लोग अपने अपने घर के आस पास हरियाली लगाएं और बच्चे - जवान सभी दाना पानी दें ताकि आने वाली नस्लें भी इस बेजुबान चिड़िया की कदर करे और मोहब्बत को समझें और कोशिश करें की इसकी नस्ल बचाई जा सके और अपने अपने घरों में इसे लौटायी जा सके और ची ची करती घर में, रोशनदान वा आंगन में लौट आए। अगर हम अब भी बेदार नहीं हुए तो आने वाले दिनों में गौरैय्या की चहक खत्म हो जाएगी। भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी डाक टिकट वा फर्स्ट डे कवर के ज़रिए मेरी बिटिया इंजीनियर हया फातिमा लोगों तक यह पैग़ाम देना चाहती हैं की भारत में खत्म होते हुए चिड़िया को बचाने में अपना पूरा सहयोग दें।

बेगम नसीमा रज़ा
मोबाइल : 9450657131